आपका विवाह किस दिशा में होगा? जानें दुर्ग भिलाई ज्योतिष लक्ष्मी नारायण से

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Best Astrologer in Durg Bhilai – लक्ष्मी नारायण | कुंडली , दोष निवारण – आपका विवाह किस दिशा में होगा

आपका विवाह किस दिशा में होगा? जानें दुर्ग भिलाई ज्योतिष लक्ष्मी नारायण से

आपका विवाह किस दिशा में होगा? जानें दुर्ग भिलाई ज्योतिष लक्ष्मी नारायण से

नमस्कार दोस्तों! आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर। हर जवान लड़के या लड़की और उनके माता-पिता के मन में यह सवाल जरूर आता है कि “मेरी शादी कहाँ होगी?” या “मेरा जीवनसाथी कहाँ से मिलेगा?”। यह एक ऐसी जिज्ञासा है जो बहुत स्वाभाविक है। क्या आप जानते हैं कि आपकी जन्म कुंडली में यह राज़ छुपा हुआ है? जी हाँ, ज्योतिष शास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जो आपकी कुंडली का विश्लेषण करके यह बता सकता है कि आपका ससुराल किस दिशा में हो सकता है।

आज इस पोस्ट में, हम दुर्ग-भिलाई के जाने-माने और अनुभवी ज्योतिषी, एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मी नारायण जी के ज्ञान के आधार पर, आपको बहुत ही सरल भाषा में समझाएंगे कि कुंडली से विवाह की दिशा कैसे जानी जाती है। लक्ष्मी नारायण जी, जो सुपेला, भिलाई में अपने ज्योतिष परामर्श केंद्र के लिए प्रसिद्ध हैं, उन्होंने हज़ारों कुंडलियों का अध्ययन करके लोगों को सही मार्गदर्शन दिया है।

जन्म कुंडली और विवाह की दिशा - एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मी नारायण

शादी की दिशा जानना क्यों इतना रोमांचक है?

पुराने ज़माने में, जब फ़ोन या इंटरनेट नहीं थे, तब लोग ज्योतिषियों से यह सवाल जरूर पूछते थे। इससे उन्हें यह अंदाज़ा लगाने में मदद मिलती थी कि उनकी बेटी या बेटा शादी के बाद उनसे कितनी दूर या किस तरफ जाएगा। आज के समय में भी, यह जिज्ञासा कम नहीं हुई है। लोग बस यह जानना चाहते हैं कि उनका होने वाला जीवनसाथी उनके अपने शहर से होगा, किसी दूसरे राज्य से, या शायद विदेश से!

यह जानना न केवल रोमांचक है, बल्कि कभी-कभी यह कुंडली मिलान और रिश्ते की योजना बनाने में भी सहायक हो सकता है।

ज्योतिष और विवाह की दिशा का क्या सम्बन्ध है?

वैदिक ज्योतिष में, हर चीज़ के लिए खास ‘घर’ (भाव) और ‘ग्रह’ होते हैं।

  • सप्तम भाव (7th House): आपकी कुंडली का सातवाँ घर ‘विवाह का घर’ कहलाता है। यह घर, इसका स्वामी (सप्तमेश), और इसमें बैठे ग्रह आपके जीवनसाथी और ससुराल के बारे में सब कुछ बताते हैं।
  • शुक्र ग्रह (Venus): शुक्र को विवाह और प्रेम का कारक ग्रह माना गया है। पुरुषों की कुंडली में शुक्र पत्नी का और महिलाओं की कुंडली में गुरु (Jupiter) पति का कारक होता है, लेकिन दिशा जानने के लिए शुक्र की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
  • राशियाँ (Zodiac Signs): हर राशि की अपनी एक दिशा होती है (जैसे मेष – पूर्व)।

दुर्ग भिलाई के ज्योतिष विशेषज्ञ लक्ष्मी नारायण जी बताते हैं कि किसी एक चीज़ को देखकर दिशा का पता नहीं लगाया जा सकता। एक सटीक भविष्यवाणी के लिए इन सभी चीजों (7वां घर, शुक्र, राशियाँ) का एक साथ विश्लेषण करना पड़ता है।

विधि 1: सप्तम भाव और सप्तमेश से जानें ससुराल की दिशा

यह सबसे मुख्य और प्रचलित तरीका है। आपकी कुंडली में सातवें घर का जो ‘मालिक’ ग्रह (सप्तमेश) है, वह कुंडली के जिस घर में जाकर बैठता है, वह दिशा आपके ससुराल की दिशा हो सकती है।

इसे सरल बनाते हैं। मान लीजिए आपकी कुंडली में सातवें घर में “7” नंबर लिखा है (तुला राशि)। इसका मालिक शुक्र हुआ। अब देखें कि शुक्र आपकी कुंडली के किस घर में बैठा है।

सप्तमेश की विभिन्न भावों में स्थिति और दिशा

दुर्ग-भिलाई के ज्योतिष श्री लक्ष्मी नारायण जी के अनुसार, सप्तमेश की स्थिति बहुत कुछ बयां करती है:

  • सप्तमेश लग्न (पहले घर) में: जीवनसाथी बहुत दूर से नहीं होता। कई बार यह आपके आस-पास, आपके अपने शहर या करीबी रिश्तेदारी से भी हो सकता है। दिशा आपके जन्म स्थान के करीब ही होती है।
  • सप्तमेश दूसरे या बारहवें घर में: यह भी करीबी या जान-पहचान के दायरे में विवाह का संकेत देता है।
  • सप्तमेश तीसरे या ग्यारहवें घर में: जीवनसाथी का घर न बहुत पास न बहुत दूर, एक मध्यम दूरी पर हो सकता है।
  • सप्तमेश चौथे घर में: चौथा घर ‘घर’ का होता है। यह अक्सर दिखाता है कि जीवनसाथी आपके जन्म स्थान या गृह नगर के आस-पास का ही हो सकता है।
  • सप्तमेश पंचम या नवम भाव में: यह प्रेम विवाह का संकेत हो सकता है। जीवनसाथी आपके शिक्षा स्थान या किसी यात्रा के दौरान मिल सकता है। दिशा का निर्धारण उस घर में बैठी राशि से होगा।
  • सप्तमेश दशम भाव में: आपका जीवनसाथी आपके काम-काज (Workplace) के स्थान से हो सकता है। यह दिशा आपके कर्म क्षेत्र से जुड़ी होगी।
  • सप्तमेश सप्तम भाव में (स्वगृही): यह बहुत अच्छा योग है। जीवनसाथी आपके ही शहर या आस-पास के क्षेत्र से मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
  • सप्तमेश अष्टम भाव में: यह अक्सर अप्रत्याशित (unexpected) जगह से रिश्ता या विदेश से संबंध का संकेत दे सकता है।

यह एक सामान्य जानकारी है। सही ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए अपनी कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को ही दिखानी चाहिए।

सारणी 1: सप्तम भाव में ग्रह और संभावित दिशा

सातवें घर में कौन सा ग्रह बैठा है, वह भी दिशा का संकेत देता है।

ग्रह (Planet) ग्रह की दिशा (Direction) संभावित परिणाम
सूर्य (Sun) पूर्व (East) जीवनसाथी पूर्व दिशा से या कोई सम्मानित परिवार से हो सकता है।
चंद्र (Moon) उत्तर-पश्चिम (North-West) जीवनसाथी उत्तर-पश्चिम दिशा से या बहुत भावुक और सुंदर हो सकता है।
मंगल (Mars) दक्षिण (South) जीवनसाथी दक्षिण दिशा से या साहसी स्वभाव का हो सकता है।
बुध (Mercury) उत्तर (North) जीवनसाथी उत्तर दिशा से, बुद्धिमान और युवा दिखने वाला हो सकता है।
गुरु (Jupiter) उत्तर-पूर्व (North-East) जीवनसाथी उत्तर-पूर्व दिशा से, ज्ञानी और सम्मानित हो सकता है।
शुक्र (Venus) दक्षिण-पूर्व (South-East) जीवनसाथी दक्षिण-पूर्व दिशा से, बहुत आकर्षक और कला-प्रेमी हो सकता है।
शनि (Saturn) पश्चिम (West) जीवनसाथी पश्चिम दिशा से या अपनी उम्र से अधिक परिपक्व हो सकता है।
राहु/केतु दक्षिण-पश्चिम (South-West) यह अक्सर अपारंपरिक विवाह, दूर स्थान या विदेश से संबंध का संकेत देते हैं।

विधि 2: आपकी राशि और सातवें घर की राशि से जानें दिशा

हर राशि की अपनी एक दिशा और एक तत्व (अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल) होता है। एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मी नारायण जी के अनुसार, यह दूसरा सबसे महत्वपूर्ण तरीका है।

मुख्य रूप से तीन चीजें देखी जाती हैं:

  1. आपकी चंद्र राशि (Moon Sign)
  2. आपके लग्न (Lagna/Ascendant) की राशि
  3. आपके सातवें घर (7th House) में जो राशि है

इन तीनों में से, सातवें घर में जो राशि है, वह सबसे मजबूत संकेत देती है।

सारणी 2: राशियाँ और उनकी दिशाएं

नीचे दी गई तालिका देखें और पता करें कि आपके सातवें घर में कौन सी राशि (नंबर) है और उसकी दिशा क्या है:

राशि (Zodiac Sign) राशि का नंबर तत्व (Element) दिशा (Direction)
मेष (Aries) 1 अग्नि (Fire) पूर्व (East)
वृषभ (Taurus) 2 पृथ्वी (Earth) दक्षिण (South)
मिथुन (Gemini) 3 वायु (Air) पश्चिम (West)
कर्क (Cancer) 4 जल (Water) उत्तर (North)
सिंह (Leo) 5 अग्नि (Fire) पूर्व (East)
कन्या (Virgo) 6 पृथ्वी (Earth) दक्षिण (South)
तुला (Libra) 7 वायु (Air) पश्चिम (West)
वृश्चिक (Scorpio) 8 जल (Water) उत्तर (North)
धनु (Sagittarius) 9 अग्नि (Fire) पूर्व (East)
मकर (Capricorn) 10 पृथ्वी (Earth) दक्षिण (South)
कुंभ (Aquarius) 11 वायु (Air) पश्चिम (West)
मीन (Pisces) 12 जल (Water) उत्तर (North)

इस तालिका का उपयोग कैसे करें?

अपनी कुंडली खोलें। देखें कि सातवें घर (7th House) में कौन सा नंबर लिखा है।

  • अगर वहां 1, 5, या 9 (मेष, सिंह, धनु) लिखा है, तो आपके ससुराल की दिशा पूर्व हो सकती है।
  • अगर वहां 2, 6, या 10 (वृषभ, कन्या, मकर) लिखा है, तो दिशा दक्षिण हो सकती है।
  • अगर वहां 3, 7, या 11 (मिथुन, तुला, कुंभ) लिखा है, तो दिशा पश्चिम हो सकती है।
  • अगर वहां 4, 8, या 12 (कर्क, वृश्चिक, मीन) लिखा है, तो दिशा उत्तर हो सकती है।

विधि 3: शुक्र (Venus) की स्थिति से दिशा का ज्ञान

विवाह के लिए शुक्र ग्रह की स्थिति देखना बहुत ज़रूरी है। आपकी कुंडली में शुक्र जिस राशि में बैठा है, उस राशि की दिशा (ऊपर दी गई सारणी 2 देखें) भी आपके जीवनसाथी की दिशा हो सकती है।

उदाहरण: मान लीजिए किसी की कुंडली में शुक्र “वृषभ” राशि (नंबर 2) में बैठा है। वृषभ की दिशा ‘दक्षिण’ होती है। तो यह एक संभावना है कि उसका जीवनसाथी दक्षिण दिशा से हो।

ससुराल की दूरी कैसे जानें? (पास या दूर)

दिशा के साथ-साथ लोग दूरी भी जानना चाहते हैं। दुर्ग भिलाई ज्योतिष के विशेषज्ञ लक्ष्मी नारायण जी बताते हैं कि इसका संकेत भी राशियों के ‘स्वभाव’ से मिलता है।

राशियाँ तीन प्रकार की होती हैं:

  1. चर राशि (Movable): मेष, कर्क, तुला, मकर (1, 4, 7, 10)
  2. स्थिर राशि (Fixed): वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ (2, 5, 8, 11)
  3. द्विस्वभाव राशि (Dual): मिथुन, कन्या, धनु, मीन (3, 6, 9, 12)

अब इस ज्ञान को सातवें घर से जोड़ें:

सारणी 3: राशि का स्वभाव और ससुराल की दूरी

सातवें घर की राशि का स्वभाव राशियाँ ससुराल की दूरी का संकेत
स्थिर (Fixed) वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ विवाह पास में या उसी शहर में होने की संभावना।
द्विस्वभाव (Dual) मिथुन, कन्या, धनु, मीन विवाह मध्यम दूरी पर (न बहुत पास, न बहुत दूर)।
चर (Movable) मेष, कर्क, तुला, मकर विवाह बहुत दूर या विदेश में भी होने की संभावना।

एक महत्वपूर्ण नोट: “यह इतना आसान नहीं है!”

दोस्तों, हमने आपको ऊपर जो 3-4 तरीके बताये, वे ज्योतिष शास्त्र के मूल सिद्धांत हैं। लेकिन एक सटीक भविष्यवाणी करना एक डॉक्टर की सर्जरी करने जैसा है।

एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मी नारायण जी (दुर्ग भिलाई वाले) हमेशा कहते हैं कि एक ज्योतिषी को इन सभी तरीकों को एक साथ मिलाकर देखना होता है।

क्या मुश्किलें आती हैं?

  • हो सकता है सातवें घर की राशि ‘पूर्व’ दिशा दिखाए, लेकिन सप्तमेश ‘पश्चिम’ दिशा में बैठा हो।
  • हो सकता है शुक्र ‘उत्तर’ दिशा का संकेत दे रहा हो।
  • इन सब पर शनि या राहु जैसे ग्रहों की ‘दृष्टि’ पड़ रही हो, जो पूरी कहानी को बदल सकती है।
  • ‘नवांश कुंडली’ (D9 Chart), जो खास शादी के लिए देखी जाती है, वह कुछ और ही कहानी कह रही हो।

ऐसे में, एक आम इंसान जो ज्योतिष नहीं जानता, वह उलझ (confuse) सकता है। इसीलिए, अगर आप सच में और पूरी सटीकता से जानना चाहते हैं कि “आपका विवाह किस दिशा में होगा?”, तो आपको एक अनुभवी ज्योतिषी से व्यक्तिगत परामर्श लेना चाहिए।

घर बैठे पाएं सटीक जानकारी: मिलें एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मी नारायण से

अगर आप दुर्ग, भिलाई, रायपुर या छत्तीसगढ़ में कहीं भी रहते हैं, या दुनिया के किसी भी कोने से बैठकर अपनी कुंडली का सटीक विश्लेषण करवाना चाहते हैं, तो एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मी नारायण जी आपकी मदद के लिए उपलब्ध हैं।

एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मी नारायण - दुर्ग भिलाई ज्योतिष

क्यों चुनें दुर्ग-भिलाई के लक्ष्मी नारायण जी को?

  • सालों का अनुभव: उनके पास हज़ारों कुंडलियों के विश्लेषण का गहरा अनुभव है।
  • सरल उपाय: वह डराने वाले नहीं, बल्कि बहुत ही सरल और सटीक उपाय बताने के लिए जाने जाते हैं।
  • सटीक भविष्यवाणी: विवाह, करियर, स्वास्थ्य, या अन्य ज्योतिषीय विषयों पर उनका मार्गदर्शन बहुत सटीक रहा है।
  • आपकी अपनी भाषा में: वह बहुत ही सरल हिंदी में समझाते हैं, ताकि आठवीं कक्षा का बच्चा भी ज्योतिष के रहस्यों को समझ सके।

अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाएं!

क्या आप अपने विवाह की दिशा, समय, और अपने होने वाले जीवनसाथी के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं? आज ही एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मी नारायण जी से संपर्क करें।

ज्योतिष परामर्श केंद्र (Jyotish Paramarsh Kendra)

एस्ट्रोलॉजर: लक्ष्मी नारायण जी

पता: 1400, कृपाल नगर, अवंती बाई चौक, सुपेला, भिलाई, छत्तीसगढ़ (1400, Kripal Nagar, Avanti Bai Chowk, Supela, Bhilai, Chhattisgarh)

WhatsApp / Mob: 70001-30353

निष्कर्ष (Conclusion)

तो दोस्तों, आज हमने जाना कि “आपका विवाह किस दिशा में होगा” यह पता लगाना कितना रोमांचक है। ज्योतिष हमें इसके लिए कई तरीके देता है, जैसे कि सातवां घर, सप्तमेश, शुक्र की स्थिति और राशियाँ। हमने यह भी सीखा कि राशियों के स्वभाव (चर, स्थिर, द्विस्वभाव) से हम ससुराल की दूरी का भी अंदाज़ा लगा सकते हैं।

लेकिन, यह याद रखना बहुत ज़रूरी है कि ज्योतिष एक गहरा समंदर है। एक सटीक और सही जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। आपकी कुंडली एक खजाने का नक्शा है, और एक अच्छा ज्योतिषी ही उस नक्शे को सही से पढ़ सकता है।

इस पोस्ट से जुड़ा कोई भी सवाल हो, या आप अपनी कुंडली दिखवाना चाहते हों, तो दुर्ग भिलाई के बेस्ट ज्योतिषी लक्ष्मी नारायण जी से संपर्क करने में संकोच न करें।

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